10 Best Ways to Avoid Cheque Bouncing | चेक बाउंस से कैसे बचें: कारण, उपाय और कानूनी जानकारी

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10 Best Ways to Avoid Cheque Bouncing

चेक बाउंस से कैसे बचें: कारण, उपाय और कानूनी जानकारी

10 Best Ways to Avoid Cheque Bouncing | चेक बाउंस से कैसे बचें: कारण, उपाय और कानूनी जानकारी

 

आज के डिजिटल युग में भी चेक (Cheque) बैंकिंग और व्यावसायिक लेन-देन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। लेकिन जब कोई चेक बाउंस (Cheque Bounce) हो जाता है, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनता है, बल्कि कानूनी परेशानियाँ और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचाता है। भारत में चेक बाउंस होना निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत एक दंडनीय अपराध है, जिसमें 2 साल तक की जेल और/या जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि चेक बाउंस क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

चेक बाउंस क्या होता है :-

जब आप किसी को भुगतान के लिए चेक देते हैं और बैंक उस चेक को किसी कारण से अस्वीकार कर देता है, तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है। बैंक इस स्थिति में एक “Cheque Return Memo” जारी करता है, जिसमें चेक अस्वीकृत होने का कारण लिखा होता है। यह स्थिति चेक जारी करने वाले (Drawer) और चेक प्राप्त करने वाले (Payee) दोनों के लिए परेशानीदायक होती है।

चेक बाउंस होने के प्रमुख कारण :-

चेक बाउंस होने के कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है ताकि उनसे बचा जा सके।

1. खाते में अपर्याप्त धनराशि (Insufficient Funds): यह सबसे सामान्य कारण है। जब खाते में चेक की राशि से कम पैसे होते हैं तो बैंक चेक वापस कर देता है। इसे “Funds Insufficient” के रूप में दर्शाया जाता है।

2. हस्ताक्षर का मेल न खाना (Signature Mismatch): यदि चेक पर किया गया हस्ताक्षर बैंक में दर्ज हस्ताक्षर (Specimen Signature) से मेल नहीं खाता, तो बैंक उस चेक को अस्वीकृत कर देता है।

3. काटना-पीटना या ओवर-राइटिंग (Overwriting/Alteration): चेक पर किसी भी जानकारी — राशि, तारीख, नाम — में काट-छाँट या ओवर-राइटिंग होने पर बैंक चेक स्वीकार नहीं करता।

4. तारीख से संबंधित त्रुटि (Date Issues): चेक पर गलत तारीख, पुरानी तारीख (Stale Cheque — 3 महीने से पुराना चेक) या भविष्य की तारीख (Post-Dated Cheque) समय से पहले लगाने पर चेक बाउंस हो सकता है।

5. राशि में अंतर (Amount Mismatch): चेक पर अंकों (Figures) में लिखी राशि और शब्दों (Words) में लिखी राशि अलग-अलग होने पर बैंक चेक को अस्वीकृत कर देता है।

6. अधूरी जानकारी (Incomplete Information): लाभार्थी का नाम, तारीख, या राशि न भरी होने पर भी चेक बाउंस हो सकता है।

7. खाता बंद होना (Account Closed): यदि जिस खाते से चेक जारी किया गया है वह बंद या फ्रीज हो गया है, तो चेक अस्वीकृत हो जाएगा।

8. स्टॉप पेमेंट इंस्ट्रक्शन: यदि चेक जारी करने वाले ने बैंक को उस चेक का भुगतान रोकने का निर्देश दिया हो तो भी चेक बाउंस होता है।

चेक बाउंस से बचने के प्रभावी उपाय :-

1. खाते में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें

किसी को चेक देने से पहले अपने बैंक खाते का बैलेंस अवश्य जाँचें। केवल उतनी ही राशि का चेक जारी करें जितनी आपके खाते में उपलब्ध हो। बैंक के नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के माध्यम से नियमित रूप से अपना बैलेंस चेक करते रहें। SMS अलर्ट की सुविधा अवश्य लें ताकि हर लेन-देन की सूचना तुरंत मिलती रहे।

2. हस्ताक्षर सावधानी से करें

चेक पर हमेशा वही हस्ताक्षर करें जो बैंक में दर्ज (Registered) है। यदि आपके हस्ताक्षर बदल गए हों तो बैंक में जाकर नमूना हस्ताक्षर (Specimen Signature) अपडेट करवाएं। हड़बड़ी में हस्ताक्षर करने से बचें, क्योंकि इससे हस्ताक्षर में अंतर आ सकता है।

3. चेक पर लिखावट स्पष्ट और सही रखें

चेक भरते समय राशि अंकों और शब्दों दोनों में बिल्कुल सही और समान लिखें। लाभार्थी का नाम सही व स्पष्ट रूप से भरें। किसी भी तरह की काट-छाँट या ओवर-राइटिंग से बचें। यदि गलती हो जाए तो उस चेक को रद्द (Cancel) कर नया चेक जारी करें।

4. चेक की तारीख सही भरें

चेक पर हमेशा सही और वर्तमान तारीख भरें। पोस्ट-डेटेड चेक (भविष्य की तारीख का चेक) केवल तभी दें जब आप आश्वस्त हों कि उस तारीख तक आपके खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध होगी। 3 महीने से अधिक पुराना चेक (Stale Cheque) बैंक स्वीकार नहीं करता, इस बात का ध्यान रखें।

5. ओवरड्राफ्ट सुविधा लें

यदि आप नियमित रूप से बड़े लेन-देन करते हैं, तो अपने बैंक से ओवरड्राफ्ट (Overdraft) सुविधा लेने पर विचार करें। इससे यदि खाते में अपर्याप्त बैलेंस भी हो, तो बैंक एक सीमा तक भुगतान कर देता है और चेक बाउंस नहीं होता।

6. चेक बुक सुरक्षित रखें

अपनी चेक बुक हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें। खाली (Blank) चेक पर कभी भी हस्ताक्षर न करें। यदि चेक बुक खो जाए तो तुरंत बैंक को सूचित कर उसे ब्लॉक करवाएं।

7. चेक इश्यू करने का रिकॉर्ड रखें

जितने भी चेक जारी करें, उनका रिकॉर्ड एक रजिस्टर में या चेक बुक के स्टब (Stub) में अवश्य दर्ज करें। इससे आप ट्रैक कर सकते हैं कि कितने चेक पेंडिंग हैं और उनके लिए खाते में कितनी राशि चाहिए।

8. बैंक को स्टॉप पेमेंट इंस्ट्रक्शन समय पर दें

यदि किसी कारण से आप जारी किया गया चेक रोकना चाहते हों, तो बैंक को स्टॉप पेमेंट इंस्ट्रक्शन जल्द से जल्द दें। यह सुविधा नेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप या बैंक शाखा के माध्यम से दी जा सकती है।

चेक बाउंस होने पर कानूनी प्रावधान :-

निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के अनुसार चेक बाउंस एक आपराधिक अपराध है। इस धारा के तहत:

  • सजा: 2 वर्ष तक का कारावास
  • जुर्माना: चेक की राशि का दोगुना तक
  • दोनों: अदालत के विवेक पर

यदि चेक बाउंस हो जाता है, तो चेक प्राप्तकर्ता (Payee) को बाउंस की सूचना मिलने के 30 दिन के भीतर चेक जारीकर्ता को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजना होगा। इसके बाद चेक जारीकर्ता के पास 15 दिन का समय होता है कि वह राशि का भुगतान करे। यदि वह भुगतान नहीं करता, तो पीड़ित पक्ष मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) :-

प्रश्न 1: चेक बाउंस होने पर बैंक कितना शुल्क लेता है? उत्तर: अलग-अलग बैंकों की शुल्क संरचना भिन्न होती है, लेकिन सामान्यतः बैंक चेक बाउंस पर ₹150 से ₹800 तक का शुल्क (Penalty Charge) लेते हैं। यह शुल्क चेक जारीकर्ता और चेक जमा करने वाले दोनों के खाते से काटा जा सकता है।

प्रश्न 2: क्या एक ही चेक को दोबारा जमा किया जा सकता है? उत्तर: हाँ, बाउंस हुए चेक को एक बार फिर जमा किया जा सकता है। हालाँकि, यह बैंक की नीति और चेक बाउंस के कारण पर निर्भर करता है। यदि बाउंस का कारण अपर्याप्त बैलेंस था और खाते में बाद में पैसे आ गए हों, तो चेक दोबारा जमा किया जा सकता है।

प्रश्न 3: चेक बाउंस की शिकायत कहाँ करें? उत्तर: चेक बाउंस पर संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत दर्ज कराने से पहले 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजना और 15 दिनों की प्रतीक्षा अवधि पूरी करना अनिवार्य है।

प्रश्न 4: पोस्ट-डेटेड चेक बाउंस होने पर क्या होगा? उत्तर: पोस्ट-डेटेड चेक (भविष्य की तारीख का चेक) बाउंस होने पर भी धारा 138 के तहत कानूनी कार्यवाही की जा सकती है, बशर्ते चेक पर लिखी तारीख को उसे बैंक में प्रस्तुत किया गया हो।

प्रश्न 5: चेक बाउंस का CIBIL स्कोर पर क्या असर पड़ता है? उत्तर: बार-बार चेक बाउंस होने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) प्रभावित होती है और CIBIL स्कोर नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है। इससे भविष्य में लोन मिलने में कठिनाई हो सकती है।

प्रश्न 6: क्या माफी मांगने पर चेक बाउंस का मामला खत्म हो सकता है? उत्तर: यदि चेक जारीकर्ता 15 दिनों के भीतर संपूर्ण राशि का भुगतान कर देता है, तो कानूनी कार्यवाही से बचा जा सकता है। इसके अलावा, दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से मामला भी सुलझाया जा सकता है।

प्रश्न 7: क्या केवल पर्सनल चेक पर धारा 138 लागू होती है? उत्तर: नहीं, धारा 138 व्यक्तिगत, व्यावसायिक, कंपनी — सभी प्रकार के चेक पर लागू होती है। चाहे चेक किसी भी व्यक्ति, फर्म या कंपनी द्वारा जारी किया गया हो।

प्रश्न 8: चेक पर गलती हो जाए तो क्या करें? उत्तर: यदि चेक भरते समय कोई गलती हो जाए — जैसे राशि गलत लिखना या नाम में त्रुटि — तो उस चेक को CANCEL लिखकर काट दें और नया चेक जारी करें। गलत चेक पर ओवर-राइटिंग करने से बचें, क्योंकि इससे चेक बाउंस हो सकता है।

प्रश्न 9: डिजिटल पेमेंट विकल्प क्या हैं जिनसे चेक बाउंस से बचा जा सके? उत्तर: आज UPI, NEFT, RTGS, IMPS जैसे डिजिटल पेमेंट विकल्प उपलब्ध हैं, जो तुरंत और सुरक्षित भुगतान करते हैं। इनमें बाउंस जैसी कोई समस्या नहीं होती। बड़े लेन-देन के लिए RTGS और NEFT का उपयोग करना एक सुरक्षित विकल्प है।

प्रश्न 10: चेक कितने दिनों के लिए वैध होता है? उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, चेक जारी होने की तारीख से 3 महीने (90 दिन) तक वैध होता है। इसके बाद वह Stale Cheque (बासी चेक) हो जाता है और बैंक उसे स्वीकार नहीं करता।

चेक बाउंस से बचने के लिए स्मार्ट टिप्स :-

चेक जारी करने से पहले हमेशा 4C का नियम याद रखें — Correct Balance (सही बैलेंस), Correct Date (सही तारीख), Correct Amount (सही राशि), और Correct Signature (सही हस्ताक्षर)। इन चार बातों का ध्यान रखकर आप चेक बाउंस की अधिकांश समस्याओं से बच सकते हैं।

इसके अलावा, बड़े और नियमित भुगतानों के लिए जहाँ तक संभव हो NEFT/RTGS/UPI जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग करें। ये न केवल तेज़ और सुरक्षित हैं, बल्कि इनमें कागजी चेक से जुड़ी कोई भी परेशानी नहीं होती।

निष्कर्ष

चेक बाउंस केवल एक बैंकिंग समस्या नहीं है — यह एक कानूनी और वित्तीय संकट बन सकती है। थोड़ी-सी सावधानी और जागरूकता से आप इससे पूरी तरह बच सकते हैं। खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखना, चेक सावधानी से भरना, हस्ताक्षर सही करना, और समय-समय पर बैंक स्टेटमेंट जाँचना — ये सरल उपाय आपको चेक बाउंस की परेशानी से हमेशा दूर रखेंगे। यदि फिर भी कोई समस्या आए तो बिना देर किए किसी अनुभवी वकील से कानूनी सलाह लें।

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